निंदक नियरे राखिये

“निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय,
बिन साबुन पानी बिना निर्मल करे सुभाय”
कबीर की यह वाणी भारत के वर्तमान राजनीतिक स्थिति को आईना दिखाती है। पढना जारी रखे

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