आर्यावर्त का अतीत, भारत का वर्तमान

भारत के वर्तमान सामाजिक परिवेश में आरक्षण की वस्तु स्थिति को चरितार्थ करने के लिए वैदिक काल को एक जीता जागता उदाहरण माना जा सकता है। वैदिक काल के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रन्थ महाभारत के पात्र कर्ण को इसका आधार बनाते हुए जीवंत किया जा सकता है। पढना जारी रखे

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अक्षत भारत का कोढ़ क्षेत्रीय पार्टियां

असम के कोकराझाड़ में हुई हिंसा और फिर इसके प्रतिक्रिया स्वरुप देश के कई हिस्सों से उत्तर भारतीय लोगों का पलायन सहसा भारतीय संस्कृति और एकता–अखंडता पर प्रश्न चिन्ह लगा देता है। पढना जारी रखे

पतन लाज़मी है

एक आरटीआई के ज़रिए जबसे यह खुलासा हुआ है कि हॉकी आधिकारिक रुप से  भारत का राष्ट्रीय खेल  नहीं है तब से हॉकी टीम सदमे में चली गई है और खेलों के स्तर में लगातर गिरावट देखने को मिल रही है । पढना जारी रखे

नितीश कुमार की महत्वाकांक्षा

इतिहास साक्षी है कि जब-जब बिहार सुढ़ृढ़ हुआ है तब-तब भारत की स्थिति पूरे विश्व में मजबूत हुई है। चाहे मौर्य काल हो या गुप्त काल बिहार की तरक्की से भारत का कलयाण हुआ है। एक बार फिर से बिहार पुराने कलंक को त्याग कर नए युग की ओर बढ़ रहा है। पढना जारी रखे

राम(देव)लीला :- वो छ: दिन

सलवार कमीज की भयावह रात को मन में दबाते हुए बाबा रामदेव ने अपनी दूसरी पारी का आगाज़ किया। इस बार वो अपनी गलतियों से सीख ले चुके थे, जो रामलीला मैदान को बुक करने से ही प्रतीत हो गया था। वो तमाम सुधार सहसा ही देखने को मिल सकते थे जो पहली पारी में नहीं थे, लेकिन अति राष्ट्रवाद के चक्कर में उनसे पहले ही दिन संज्ञान में रहते हुए एक गलती हो गई कि अपने सखा बालकृष्ण की मनोरम क्रांतिमय तस्वीर आजा़दी के अमर शहीदों के साथ लगा दी । पढना जारी रखे