निंदक नियरे राखिये

“निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय,
बिन साबुन पानी बिना निर्मल करे सुभाय”
कबीर की यह वाणी भारत के वर्तमान राजनीतिक स्थिति को आईना दिखाती है। पढना जारी रखे

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आर्यावर्त का अतीत, भारत का वर्तमान

भारत के वर्तमान सामाजिक परिवेश में आरक्षण की वस्तु स्थिति को चरितार्थ करने के लिए वैदिक काल को एक जीता जागता उदाहरण माना जा सकता है। वैदिक काल के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रन्थ महाभारत के पात्र कर्ण को इसका आधार बनाते हुए जीवंत किया जा सकता है। पढना जारी रखे